दूर के ढोल

वो वादी जो धरती पे जन्नत की मूरत है जहाँ की हर इक  शै बहुत खूबसूरत है हवाएँ महकती हैं खुशबू ए केसर से पर्वत सजे से हैं फूलों के जेवर से झरनों और झीलों में  बर्फीला पानी है चिनारों  के सीनों में आदिम कहानी है खुद हाथों से तोड़ के सेब आडू खाऊँ, बरसों... Continue Reading →

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