आगे आगे दौड़ेगा तो मुझसे पहले पहुँचेगा . मंजिल कहाँ कहाँ रुकना है तुझे नहीं है कोई खबर। अभी तो मौसम खुशगवार है अभी तो जीना सीखें हम, आगे जा के रुकना पड़ा तो कब तक राह तकेंगे हम? क्या तू मेरा दोस्त बनेगा मिल कर मज़े करेंगे हम, या फिर काँटे जैसा चुभेगा हर... Continue Reading →
भूलभुलैया
जैसे ज़ीना चढ़ते चढ़ते बीच की सीढ़ी हो जाए गुम, जैसे कुछ भूला ना हो,पर याद आए सब थोड़ा कम। रोज का रस्ता हो कर भी जब कुछ ना लगे पहचाना सा, अपना ही चेहरा दर्पण में लगे बड़ा अनजाना सा। चेहरा जो आंखो के आगे, उस चेहरे को नाम ना हो, और जुबां पर... Continue Reading →