उन तीनों से गहरा रिश्ता था।उन से ही फिसल के गिरनाऔर सीखा गिर के सम्हलना भी।उनके कांधों पर चढ़ना सीखाऔर सम्हल के उतरना भी।बचपन के खेलों के साथी वो थे।बड़े नेक,बड़े दिलदार थे।जब दीमक खाने लगी उनकेबदन को, सूख कर गिरने लगेटूट कर बिखरने लगे।वो जो बस देते ही रहे हमेशाखतरा क्यों लगने लगे।वो तीनों... Continue Reading →
मेरा पीपल
बचपन में अक्सर बताती थींनानीयाँ और दादीयाँकि भूत पिशाचों का वास होता हैपीपल के पेड़ों में।बचने का बस एक ही उपाय हैजब भी गुजरना पड़े पीपल के नीचे से तोनजर रहे नीची और हनुमान चालीसा जपते रहो।लेकिन मैं हमेशा जय जय जयहनुमान गुसाईं कहते कहतेधीरे से एक आँख खोल करदेख ही लेती थी ऊपर।भूत तो कभी नहीं... Continue Reading →
पहाड़ों पर अकेला वृक्ष
बहुत खूबसूरत हैं ये पहाड़उनकी धीर गंभीरता,गूढ़तामानो अनादि काल सेजाने कितने रहस्य छिपाए अपने भीतर, स्थिर खड़ेदेख रहे हैं समय का प्रवाह।लेकिन उनसे भी अद्भुत लगता हैइन पर्वत श्रेणियों के माथे पर खड़ा वो अकेला वृक्ष।वो बूढ़ा बरगद का पेड़जिसकी सहस्त्र भुजाओं केघेरे में एक ब्रह्माण्ड बसता है।गर्मियों की झुलसती धूप सेघबरा कर छोटी मोटी झाड़ियांँऔर घाँस... Continue Reading →
मैनें जंगल बोया
मैने पृथ्वी को प्रेम पत्र लिखेधरती के सीने में उतर करमेरे इन पत्रों ने पहुँचाया मेरा प्रेमऔर मेरा आभार धरती के हृदय तकऔर अब आने लगे हैं मेरे पत्रों के जवाब चमकीले, हरे रंगों में।ये हरे लफ्ज़ हवा में लहरातेसुनाते है पृथ्वी का जवाबी संदेशकि अभी भी बाकी है गुंजाईशमिल सकती है माफीऔर सुधारे जा सकते हैं रिश्ते,अगर हम कोशिश जारी रखें।और... Continue Reading →
कभी उस ‘उस’ से मिलना तुम
वो उसका जुल्फें सँवारने का ढंग वो उसके खूबसूरत पैराहन का रंग वो उसकी पेशानी पर पड़ी हल्की सी सलवट वो उसकी बेबात मुस्कुराने की आदत वो उसकी शक्ल ओ सूरत और अदाएं वो ऐसी भी है लेकिन क्या बताएं तुम्हें भी तो वो अक्सर मिलती ही होगी ज़रा सी बेतक़ल्लुफ बात भी करती ही होगीमगर जो फुर्सत हो किसी दिन यूँ भी... Continue Reading →
ग़ज़ल
चाहे हाथ ना हो बाग पे,ना पा हो रिकाब मेंमर्जी हमारी हम जो जी चाहे,देखेंगे ख्वाब में।मौत का एक दिन मुअय्यन हैक्यों डर के जीना छोड़ कर बैठें शिताब मेंहारे हैं इश्क में,मगर उम्मीद है बाकीसूखे गुलाब अब भी मिलेंगे किताब में।मिलने का दिल हो,उठ के चले आते हैं खुद हीकौन आया कितनी बार,नहीं रखते हिसाब... Continue Reading →
ये बातें…
ये बातें कैसे फैलींपर्वतों की तलहटी में हरी घास की तरह...देख के वर्षा के बादलमन मोर तो मेरा नाचा था ।उन बूंदों में पहली बरखा की सिर्फ मेरा मन भीगा था ।मिट्टी की सौंधी खुशबू ने बस मुझको ही बौराया था ।सात रंग का इंद्रधनुष वोकहाँ किसे दिखलाया था ।धुली-धुली से नर्म धूप में मेरा मन अलसाया था ।फिर... Continue Reading →
उलझन
बड़ी परेशानी है.......पिछले कई सालों का हर दिनइसी क़श्मक़श में गुज़ारा हैकि क्या कम करें,क्या ज्यादाकि जिससे सेहत बनी रहे।कम तेल, कम मीठाकम चर्बी, वगैरह वगैरह...खूब वर्जिश,खूब स्टेमिनाखूब प्रोटीन्स, वगैरह वगैरह...एग यलो,एग व्हाइटये ऑइल,वो ऑइल वगैरह वगैरह...कितनी बार लगाएँ हैं तालेजबान पर और मन पर,और कुचला है लालसाओं को।इस सारी मशक्कत कीवजह बस इतनी ही हैकि चलते रहें... Continue Reading →
दो भाई
ये जो मेरे दो लड़के हैं कौरव पांडव से बढ़ के हैं ।इनको अच्छा लगता चिल्लाना लड़ने का यह ढूँढे बहाना।लाते-घूँसे चीख पुकार फेका-फेकी मारा मार। मुश्किल है इनको समझानाघर लगता है पागल खाना।राम लक्ष्मण होंगे महान यहां तो भारत-पाकिस्तान।लेकिन अद्भुत इन का खेल इस पल झगड़ा उस पल मेल।एक दूजे की चीजें चुराएँ आधी चॉकलेट बाँट के खाएं।ऐसा इस झगड़े का... Continue Reading →
पतंग
पतंगे उड़ाना, पेंच लड़ानाकटी पतंग लूटने के मज़े लूटनाहमेशा से रहा है हमारे खून में।जब कुछ और नहीं थातब से अब तक,हमारे दादा-परदादाऔर उनके दादा-परदादाऔर शायद उनके भी ,हर उम्र में प्रेम करते रहेपतंगों से और चकरियों से ।बेटे की पांचवी सालगिरह परउसके दोस्तों को तोहफे मेंदी थी रंगीन कागजी पतंगे मैंने।अब भी याद है उनकेरोमांचित चेहरे।पतंग जो... Continue Reading →